8TH SEMESTER ! भाग-31 ( आकर्षण & प्रतिकर्षण )
"आअहह......"जब दीपिका मैम बहुत देर बाद मेरे होंठो को आजाद किया तो मैं हाँफ रहा था
"Not bad.. Arman.."मेरे उपर से उठते हुए वो बोली....
"टाइम कितना हुआ..."अपने होंठो पर हाथ फिराकर लिपस्टिक साफ करते हुए मैने दीपिका मैम से पुछा....
"10 मिनट. बचे है, लंच ख़त्म होने मे.... अब तुम जाओ और उपर जाने से पहले तुम्हारे होंठो पर जो गुलाबी छाप है वो सॉफ कर लेना....."
मैने दीपिका मैम का दुपट्टा पकड़ा और उनके दुपट्टे से अपने होंठ रागड़ने लगा... पहले तो वो चौंक गई, उन्हें शायद लगा की मै उन्हें निर्वस्त्र करने वाला हूँ , शायद 😂 उनके दुपट्टे से होंठ साफ करने के बाद मै बाथरूम मे घुसा... सीसे मे देख कर खुद का हुलिया ठीक किया... बाल - वाल बनाया पर उनकी लिपस्टिक और उनके जिस्म की खुसबू मैं अब भी महसूस कर रहा था, मुझे उस वक़्त बाथरूम मे ऐसा लग रहा था जैसे कि उसका होंठ अब भी मेरे होंठो से कसकर चिपका हुआ है, मुझे उस वक़्त बहुत अच्छा लग रहा था.....लेकिन मुझे मालूम नही था कि मेरी चार साल की बर्बादी की दास्तान का पहला कदम मैने बढ़ा दिया था... और मालूम होता भी कैसे....
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"Stupid, idiot...."सीढ़ियो से उपर भागते हुए जल्दबाजी मे मैं किसी लड़की से टकराया, ग़लती मेरी ही थी जो मैं दीपिका मैम के ख़यालो मे खोया हुआ सीढीयो पर दौड़ रहा था....मैं जिस लड़की से टकराया था वो तो मेरे लिए एक नॉर्मल सी लड़की थी लेकिन उस लड़की के साथ जो खड़ी थी वो मेरे लिए नॉर्मल लड़की नही थी,...
"जान बुझ कर टकराते हो..."एश मुझे देख कर बोली...
"सॉरी, मैने ध्यान नही दिया..."
"अभी मैं भी तुम्हे ऐसे धक्का देकर गिरा दूं ,जैसे तुमने मेरे फ्रेंड को गिराया है और फिर सॉरी बोलू तो तुम्हे कैसा लगेगा...."
"बहुत अच्छा लगेगा, प्लीज़ धक्का दो ना ..."
"ज़्यादा मुस्कुराने की ज़रूरत नही है..."लड़कियो वाली हरकत करते हुए उसने अपने होंठो को शेप चेंज किया....
लेकिन फिर जैसे उसे आज सुबह वाली घटना याद आई और उसने मुझे पहचान लिया कि उसके बाय्फ्रेंड से लड़ने वाला मैं ही था तो उसके तेवर बहुत जल्दी बदल गये, उसने अपनी सहेली का हाथ थामा और तुरंत वहाँ से आगे बढ़ गयी......
"ये लड़की मेरा दिल निकाल कर ही मानेगी..."उसे जाते हुए मैने देखा और जब वो दूर हो गयी तो मैं वापस सीढ़ियो के रास्ते से अपनी क्लास की तरफ चल दिया....
कुछ लफ्ज़ बिना कहे कह गये,
कुछ लोग खास तो थे, लेकिन सब साथ छोड़ गये....
रिश्ता-नाता तो बहुत पुराना सा लगा सबसे,
पर अफ़सोस कि एक पल मे सब उस रिश्ते को कच्चे धागे की तरह तोड़ गये.....
दारू पीने के बाद काम करने मे बहुत मज़ा आता है, इस वक़्त वरुण आलू काट रहा था और अरुण को मैने बाहर दुकान भेजा हुआ था कुछ समान लाने के लिए..... और.... और दारू लाने के लिए 😁😑😜
"उस दिन दीपिका ने कुछ और नही किया क्या..."आलू काटते हुए वरुण मुझसे पुछा"तेरी बकवास लव स्टोरी को छोड़ कर सब कुछ बढ़िया चल रहा है,लेकिन एक बात बता तूने सच मे उस दिन दीपिका के साथ कुछ नही किया....?"
" हवसी समझ रहा क्या मुझे.. तू... मतलब मै हवसी हूँ.. ऐसा नही है.. पर स्टाइलिश हवसी हूँ.....".
"क्यूंकी कोई भी नॉर्मल लड़का अपने हाथ मे आया हुआ मौका ऐसे ही नही छोड़ देगा...."
"बेटा... दीपिका मैम जो थी ना... वो हम दोनो से ज़्यादा चालू थी, इसीलिए तो उसने मुझे फसाया था...."
"वो सब तो ठीक है, पहले ये देख की दारू बची है या लानी पड़ेगी...."
" एक एक पेग बन जायेगा .."
"ले फिर पेग बना और फिर तेरी सड़ी हुई लाइफ मे दोबारा जाते है...."
तब तक अरुण भी आ गया और मुझे पेग बनाते हुए देखकर बोला
"साले तेरी छुप-छुप के दारू पीने की आदत अभी तक नही गयी..."
"पहले देख तो ले बे.... तीन पेग बना रखा हूँ .."
"ओह सॉरी ! "
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बहुत ख्वाहिश थी, उसके साथ ज़िंदगी का हर पल, हर वक़्त बिताने की.....
लेकिन अफ़सोस ना तो कभी वो पल आया और ना ही कभी वो वक़्त......
"ये दीपिका मैम के लिए है या एश डार्लिंग के लिए...."हॉस्टल मे जब अनायास ही मेरे मुँह से ये निकला तो अरुण ने भी अनायास ही मुझसे पुछा....
हम दोनो अपने रूम मे बुक खोल कर बैठे हुए थे, अरुण बुक खोल कर क्या कर रहा था ये तो मुझे नही मालूम,लेकिन मैं बुक खोल कर अपने खयालो मे उड़ रहा था, कभी दीपिका मैम दिखती तो कभी उसके साथ लैब मे बिताया आज का वक़्त दिखता...तो कभी एश दिखती, उसकी भूरी-भूरी आँखे दिखती,उसके गोरे-गोरे गाल दिखते....लेकिन मज़ा तब किरकिरा हो जाता जब उसके साथ वो बकलोल गौतम दिखता.......
"बस ऐसे ही, सोचा कि आज कुछ शायरी-वायरी लिखू और ये लिख डाला...."मै अरुण से बोला"कैसा था..."
"एकदम बकवास....बोरिंग, पकाऊ... Gay type "
"मै पेलुँगा तेरे को... आगे से भी और पीछे से भी... यदि तूने आगे कुछ और कहा तो....कलाकार की कदर ही नही है कोई "
"आगे से भी और पीछे से भी "दिमाग़ पर ज़ोर डालते हुए उसने कहा"तेरे पास दो -दो है क्या...? जो एक आगे से और एक पीछे से ."
"हाँ है तो.. तू ज्यादा डिटेल मे मत घुस "
"दो दो अंग वाले बाबा.."
आज से कुछ साल पहले का तो कन्फर्म नही बता सकता लेकिन उस समय कॉलेज लाइफ से फ़ेसबुक ना जुड़ा हो ये इंपॉसिबल ही होता था, ये एक वाइरस की तरह फैला हुआ था , जिन लड़को की गर्ल फ्रेंड होती वो तो अपने मोबाइल मे बिज़ी रहते और जिन लड़को की गर्ल फ्रेंड नही थी वो अक्सर देर रात तक फ़ेसबुक मे अपने लिए गर्लफ्रेंड ढूँढने मे लगे रहते, अरुण की भी कोई गर्ल फ्रेंड नही थी और यही वजह थी कि उसके मोबाइल मे फ़ेसबुक हमेशा खुला रहता,.....
"दीपिका मैम , की आइडी मिल गयी... बल्ले.. बल्ले "अरुण बिस्तर से कूद कर मेरे पास आया और मुझे दीपिका मैम की प्रोफाइल दिखाते हुए बोला"अब मैं इसको फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजूँगा, फिर हम दोनो देर रात तक चैटिंग -सैटिंग करेंगे... फिर वो तेरी जगह मुझे लैब मे असाइनमेंट देगी... हाँ, ये हो सकता है..."
"कहीं तुझे ब्लॉक कर दिया तो...ये भी तो हो सकता है "
"मैं तो बस अंदाज़ा लगा रहा हूँ..."
अरुण के 140 एमएम चौड़े ,167एमएम लंबे ,93 एमएम उचाई और 150 पॉंड वेट वाले ब्रेन मे एक शिकारी चाल उस वक़्त घर कर गई, जब उसने मुझसे मेरी फ़ेसबुक आइडी माँगी और जब मैने उसे कहा कि मैं फेसबुक मे नही हूँ तो वो दाँत दिखाकर हँसते हुए अपने मोबाइल मे बिज़ी हो गया और कुछ ही देर मे उसने खुद से मेरी फेसबुक आइडी बना दी और मुझे ईमेल आइडी और पासवर्ड देते हुए बोला...
"ये रही तेरी फेसबुक आइडी और आज के बाद कोई भी पूछे तो यही आइडी बताना..."
"तू करने क्या वाला है...."
"दीपिका मैम को इससे रिक्वेस्ट भेजूँगा और रात भर अरमान बनकर उससे चैट करूँगा.... सेक्सी -सेक्सी बाते करूँगा... 😍"
"अबे मरवाएगा क्या भाई, वो 200 असाइनमेंट दे देगी मुझे फिर..."
"टेन्षन मत ले, ये फर्स्ट टाइम नही है...जब मैं अपने दोस्तो की फ़ेसबुक आइडी से चैट करूँगा... मै मास्टर हूँ, इस मामले मे..."
क्या करता मैं, उसकी बात माननी पड़ी दोस्त जो था मेरा.... वैसे भी अपना सिद्धांत है... ~ मित्रता परमो धर्म : इसलिए मित्र धर्म तो निभाना ही था, वैसे भी साले से लगाव सा हो गया था, उसकी बकलोली अच्छी लगने लगी थी और एक बात जो थी कि वो मुझे एक काबिल इंजीनियर बना रहा था ,रोज रात को खुद सिगरेट तो पीता ही, साथ मे मुझे भी पिलाता लेकिन पैसे कभी नही माँगता और अब उसका प्लान मुझे दारू पिलाने का भी था, वो अक्सर यही कहता कि अभी टेस्ट कर ले वरना हॉस्टल के सीनियर फ्रेशर और फेरवेल मे कलेजा फाड़ के दारू पिलाएँगे तब क्या करेगा, उलटी करते रह जायेगा दो दिन.. इतनी दारू पिलायेंगे.. सीनियर्स...... जिसके बाद उसकी इस बात पर मैं बस इतना ही कहता तुझे दे दूँगा ना दारू , तू पी लेना....फिर क्या था उसके बाद हम दोनो एक दूसरे के कंधे पर हाथ डालते और फिर लड़कियों की बाते करते...... की कौन किसकी माल है, कौन कितनो से सेट है, कौन किसको देती है, कौन कितनो का लेती है etc. etc.
"दीपिका मैम ने रिक्वेस्ट आक्सेप्ट कर ली "सुबह-सुबह साले ने जागते हुए मुझसे कहा....प्लान तो मेरा 4 बजे उठकर पढ़ने का था लेकिन रात को जो आँख बंद हुई वो सुबह 8 बजे खुली थी...
"फोड़ डालूंगा, ,सोने दे..."
"तू देखना अब...इसको तो हवेली मे लाकर ही रहूँगा...."
इतना बोलकर वो चुप हो गया और दीपिका मैम को एक मेसेज टपका दिया,तभी रूम मे बनियान पहने हुए एक लड़का अपनी आँख मलते हुए आया और मुझसे बोला कि मुझे सिदार बुला रहा है,...
"कहाँ है MTL भाई ..."
"बाहर हॉस्टल वॉर्डन के साथ चाय पी रहे है..."
"तू खिसक... मै आता हूँ... तेरे साथ जाऊंगा तो बेइज्जती हो जाएगी मेरी "
चादर समेटकर मैने एक किनारे किया और सीधे हॉस्टल वॉर्डन के रूम मे जा पहुचा
"आपने बुलाया एमटीएल भाई..."
"बैठ..."मुझे बैठने का इशारा करते हुए वो बोले"ये एमटीएल क्या है...आते ही मेरा निक नेम रख दिया..."
"मल्टी टॅलेंटेड लड़का..."वैसे एमटीएल का फुल फ़ॉर्म तो मल्टी टॅलेंटेड लौंडा था, लेकिन सिदार के सामने उसी को लौंडा कहना मैने ठीक नही समझा.... कही बमक के पेल -वेल दिया तो....
"मल्टी टॅलेंटेड लड़का....ये कुछ जमा नही , ऐसा बोल मल्टी टॅलेंटेड लौंडा, ये ठीक रहेगा...."
तब तक मेरे लिए भी सिदार के इशारे पर एक कप चाय आ चुकी थी,चाय का प्याला अपने हाथ मे लेकर मैं चुस्किया लेने लगा....
"कल गौतम से लड़ाई हुई थी तेरी..."
मैं चाय पीते-पीते ही रुक गया और सिदार की तरफ देख कर बोला
"हां छोटी सी कहा सुनी हुई थी उससे और वो भी नही होती यदि उसने मेरे दोस्त पर हाथ नही उठाया होता तो..."
"थोड़ा कंट्रोल रख, ऐसे लफडे मे अभी से मत पड़....वो भी सोर्स वाला लौंडा है.... जो भी करना, बता के करना.. प्लानिंग के साथ... तभी बच पायेगा... "
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"अरे भाई वो कितने लड़के लेकर आएगा, अधिक से अधिक 50 या 100 लेकिन उससे अधिक तो अपने दोनो हॉस्टल मे रहते है और उपर से वो इतने लड़के लेकर आ भी नही पाएगा ,क्यूंकी यहाँ से कुछ दूरी पर ही एस.पी. का निवास जो है...."
"फिर भी थोड़ा कंट्रोल मे रह, तुझे मालूम नही गौतम के बारे मे.. इसीलिए ऐसा बोल रहा है तू ."
मुझे कंट्रोल मे रहने की सलाह देकर सिदार वहाँ से जाने लगा और मैं वही हॉस्टल वॉर्डन के बगल मे बैठ कर चाय की चुस्किया लेने मे बिजी हो गया ...
"NSUI का इलेक्शन लड़ेगा..??."वहाँ से जाते-जाते पीछे पलट कर सिदार ने मुझसे पुछा और मैने तुरंत अपना सर मुस्कुराते हुए....................................
Kaushalya Rani
26-Nov-2021 06:32 PM
Nice part
Reply
Barsha🖤👑
26-Nov-2021 05:34 PM
बहुत खूबसूरत भाग
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Miss Lipsa
30-Aug-2021 08:41 AM
Are waah
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